मंगलवार, 2 नवंबर 2010

गोमय एवम गोमूत्र के उत्पादन - कुछ जानकारियाँ

          गोमय (गोबर ) आधारित उत्पाद
           गोवर्धन (TM ) मच्छर क्वायल
आधुनिक जीवन में अच्छे स्वास्थ्य के लिए और रात्रि में शांत निंद्रा में मच्छर विघ्न डालते हैं और पुरे देश में इनसे बचने के लिए मच्छर भगावो कोइल उपयोग में लायी जाती है. हर दवाई और परचून की दुकान पर यह पाई जाती है और देश में विदेशी कंपनिया अरबो रूपए का व्यापर कर रही हैं. हमारा गोमय पूर्ण प्राकृतिक, रशायनविमुक्त, स्वास्थ्य प्रदक, मच्छरों को दूर भगाता है. अत्ति लाभकारी घरेलु उद्योग हर घर, गाँव में प्रारम्भ कर गोवंश रक्षा में सहायक बना जासकता है.
घटक :
१. गोबर के उपले का पावडर २ की ग्रा     (रु. १०/-)  
२.लकड़ी पावडर                २ कीग्रा       (रु. १०/-)
३.वनतुलसी पावडर        :  ४० ग्रा        (रु.   १/- )
 ४.मैदा लकड़ी पावडर       ३००ग्रा        (रु.  १/५०)  
५.तिल का तेल              :१५० एम् एल  (रु. १५/- ) 
६. सेंतरोला तेल:              ४० एम् एल  (रु. २०/- )
 ७. ग्वार गुम (चिप्पक): ४०० एम् एल   (रु.   ६/-) 
                  कुल रु. ६४/-) वजन ४.९३० किलो 
उपकरण : मिश्रणयंत्र १० किलो क्षमता, हस्त चालित प्रेस २ न.साइज़, छलनी, पेकिंग आदि
विधि: सभी पावडर मिला कर १०० नम्बर की छलनी से छानले. मिश्रण यंत्र में तेलों के साथ मिला के आते की तरह गुंधलें, लगभग १५ ग्राम की लोई बना कर रोटी तरह बेल्लें और प्रेस में डाई से दाब कर काट लें और सूखा  कर डिब्बे में पैक करले. कुल लागत (लगभग)      प्रति दिवस लगभग १२०० कोइल के उत्पादन में १८ किलो यानी ४ घान प्रति घान रु.६४/- यानी २५५/- डिब्बे १२० लगत १२०/- मजदूरी 2  दर १५० रु. ३००/- कुल रु.६७५/- और अनुमानित विक्रय प्रति पेकेट रु. १५/- से रु.१८००/- यानी लाभ ११२५/- प्रतिदिन
उद्योग प्रारंभ करने के लिए अनुमानित लागत रु. १,००,०००/- स्थान २०० वर्ग फीट का कमरा एवम कुछ खुला आँगन 
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        गोवर्धन (TM)  स्नान टिकिया (साबुन)
दैनिक दिनचर्या   का प्रारम्भ स्नान से होता है और अगर यह रासायनयुक्त, विदेशी कम्पनिओं के उत्पाद की बजाये शुद्ध गोमय से निर्मित स्नान टिकया से हो तो निश्चित ही भगवत आशीर्वाद प्राप्त हो. देश में अरबों खरबों का ये व्यवसाय इतना लाभ प्रद है की सभी प्रसारण विधाओं पर खरबों रु. का खर्च कर जनमानस को रिझाता है . यह हमारे गोवंश की आर्थिक उपलब्धता का मुख्य साधन बन सकता है. हमने विधि में चन्दन का प्रयोग दिखाया है लेकिन यह स्थान और मांग अनुसार, गुलाब, केवड़ा, केसर, कुछ भी हो सकता है. 
घटक 
१.   गोबर                १२.००० किलो        रु. २५.०० 
 २. मुल्तानी मिटटी    १०.००० किलो       रु.   ५०.०० 
२.  गेरू                   .५०० ग्राम            रु.     ३.००   
३.  नीम पत्ती            .५०० ग्राम            रु.     २.०० 
४.  बेलपत्र                .५०० ग्राम           रु.     ३.०० 
५. चन्दन चुरा            .५०  ग्राम           रु. १५०-००   
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                                   २३.५५० किलो        रु. २३३.०० 
विधि : सर्व पृथम नुल्तानी मिटटी को पिस कर पावडर बना लें और गेरू, नीमपत्र, बेलपत्र , व् गोबर को अच्छी तरह मिला लें. चार से पाँच दिन तक अच्छी तरह  सूर्य रौशनी में सुखाएँ. चक्की में पीस कर इसे पावडर बना लें. अब इसमें चन्दन पावडर मिलाएँ. 
नीमपत्र को लगभग ३-४ लिटर पानी में उबालें और इस क्वाथ से उपरोक्त को गीला कर आते की तरह सान लें. १60 ग्राम की लोई बना कर साबुन के सांचे की सहायता से मन चाही शक्ल में ढालें. इस को धुप में सूखा कर रेपर में लपेटें.
उपकरण : चक्की (छोटी), कढाई, भट्टी, सांचे, पेकिंग 
लागत: लगभग रु. १.०० लाख, 
प्रतिदिन उत्पादन क्षमता १००० टिकिया.दर रु.५/- बिक्री रु. ५,०००/- लागत कच्चा माल= ११५.०० किलो रु. १,५००/-, पेकिंग २००/-, श्रम ३ रु.४५०/-, इंधन, बिजली, २००/- कुल रु.२३५०/- लाभ: रु. २,६५०/- प्रतिदिन 
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              गोवर्धन (TM )सोंदर्य प्रसाधन (फेस पेक)

घटक 


१.   गोबर                १२.००० किलो        रु. २५.०० 
 २. मुल्तानी मिटटी    १०.००० किलो       रु.   ५०.०० 
२.  गेरू                   .५०० ग्राम            रु.     ३.००   
३.  नीम पत्ती            .५०० ग्राम            रु.     २.०० 
४.  बेलपत्र                .५०० ग्राम           रु.     ३.०० 
५. चन्दन चुरा            .१०० ग्राम           रु.  ३००-००   
विधि : उपरोक्त को अपना कर पावडर तैयार किया जाता है केवल सुगंध की मात्रा बढ़ जाती है. २०० ग्राम का पेक रु.१५/- में बिक्री किया जासकता है .
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                            गोवर्धन (TM ) धूप बत्ती 
प्रभु आराधना, शुद्धि, हवन, रोग नाश में प्रुक्त हर सुख, दुख, शांति का साधन परम्परा अनुसार धूप बत्ती आज पेट्रोल के कचरे से, पाशों की खाल के बुरादे से तारकोल आदि अस्वास्थ्यकर घटकों से बनायीं ज रही है और शुद्धता का साधन आज प्रदूषण का एक उदाहरण बनगया है. गोमय से तैयार गोवर्धन धूपबत्ती  गोरक्षा सहायक, शुद्ध, रासायन विमुक्त प्रभु को प्यारी है. 
घटक 
१. गोबर                   २.५०० किलोग्राम 
२. गौघृत                      ५०  ग्राम 
३. हवन सामग्री       १.०००  किलोग्राम 
४. चावल                    २००  ग्राम   
५. ककड़ी का बुरादा  १.०००  किलोग्राम 
६. मैदा लकड़ी             २५० ग्राम  
उपकरण : चक्की, डाई, सुखाने की ट्रे, सेविया, लच्छे की मशीन, पेकिंग आदि 
लागत : लगभग   रु. १.०० लाख 
विधि: हवन सामग्री और मैदा लकड़ी का पावडर बनाकर घृत आदि सभी घटकों को मिला, पानी में सख्त आते की तरह गुंध ले और लच्छे की मशीन से गुजारें. निकलती हुयी बत्ती को आवश्यक परिमाण में काट कर ट्रे में सुखाने को रखें. सिखने के पश्चात पेक कर लें.

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गोवर्धन (TM ) गोबर इंधन - समिधा- लकड़ी -हवन  टिकिया 
धूप, कर्पूर, घृत, होम, प्रभु अर्पण आदि कार्यो में, किसी आधार की जरुरत होती है और यह आधार गोमय द्वारा निर्मित टिकिया को प्रयोग में ला कर शुद्ध और सुचारू रूप में किया जा सकता है. लगभग २-३ इंच की ४ एम् एम्  मोटी टिकिया से २-३ इंच गोल लम्बे डंडो का निर्माण किया ज सकता है .

इंधन का प्राकृतिक विकल्प आज गोबर और कृषि अवशेष को प्रयोग में लाकर गृह, उद्योग, होटल, हलवाई, समसान, यानी किसी भी उपयोग में लाकर पेट्रोल, कोयले, बिजली आदि की बचत की ज सकती है. एक प्राणी के अंतिम संस्कार में २ से ३ वृक्षों की क्षति होती है अंत:त देश के पर्यावरण की हानि होती है. २४ टन प्रतिदिन क्षमता का ब्रिकेट संयंत्र  लगभग १५.०० लाख रु. में स्थापित हो सकता है. इसमें लगभग २०,००० किलो गोबर प्रतिदिन उपयोग में लाया जासकता है 
अत्यंत लाभप्रद  उद्योग एक वर्ष में अपनी सम्पूर्ण लागत लाभ के रूप में देने में सक्षम है  
टिकिया बनाने के लिए गोमय गोबर को समतल स्थान पर प्लास्टिक के यपर या चिकने फर्श पर बिछा लें. छोटी कटोरी को डाई के रूप में उपयोग कर काट लें और सूखने दें . सुविधानुसार पेकिंग कर विक्रय पर डाले 



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